Monday, August 13, 2012

सब्जबाग के एक साल


                   सब्जबाग के एक साल (राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका इतवार में प्रकाशित)
इंट्रो : पश्चिम बंगाल की सत्ता पर काबिज हुए ममता बनर्जी को 20 मई को एक साल पूरे हो गये। इस दौरान उनके कितने वादे पूरे हुए और कितने हवा हवाई साबित हुए। एक लेखाजोखा

पोरिबर्तन (परिवर्तन) की हांक लगाकर माकपा के अभेद्य दुर्ग को ढहा देने वाली ममता बनर्जी सरकार के 20 मई को एक साल पूरे हो गये। चुनाव प्रचार के दौरान उनका दिया गया नारा 'बदला नय, बदल चाईÓ (बदला नहीं, बदलाव चाहिए) को जनता ने हाथोंहाथ लिया था। माकपा कैडरों के दंभ को तोडऩे के लिए राज्य की जनता ने पूरे विश्वास के साथ राज्य की बागडोर उन्हें सौंप दी। सिर्फ बागडोर ही नहीं सौंपी बल्कि उन्हें इतने प्रचंड बहुमत से जिताया, जितना कोई सोच भी नहीं सकता था। खुद ममता को भी इस तरह की प्रचंड जीत की उम्मीद कतई नहीं थी। खैर माकपा शासन का अवसान करने की दीदी की मनोकामना पूरी हुई। मगर क्या जनता को दिखाये गये दीदी के सब्जबाग भी पूरे हुए। राज्य की जनता के मनोभावों को देखकर तो ऐसा नहीं लगता। जिस उद्देश्य के साथ जनता ने दीदी को राज्य की सत्ता सौंपी थी। वह उम्मीद परवान नहीं चढ़ सकी। खुद राज्य में ममता सरकार में सहयोगी कांग्रेस के प्रदेश महासचिव ओमप्रकाश मिश्रा कहते हैं कि सरकार अपने उद्देश्यों से भटक गई है। जनता की भलाई के लिए किये जाने वाले विकास कार्यों से ध्यान हटाकर सरकार गैर जरूरी कामों में उलझ गई है। यह भटकाव सरकार के लिए ठीक नहीं है। मिश्रा के अनुसार राज्य सरकार में शामिल मंत्रियों के आत्मविश्वास में भी कमी नजर आ रही है। हालांकि कांग्रेस सरकार के कामकाज से खुश नहीं है फिर भी वह ममता सरकार को अपना समर्थन जारी रखेगी। प्रदेश महासचिव मिश्रा तल्ख टिप्पड़ी करते हैं कि जनता से वादे तो थोकभाव में किये गये किन्तु पूरे एक भी नहीं हुए।

ममता के कुछ अनछुए पहलू
बागी तेवरों को देखते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मीडिया ने अग्निकन्या का संबोधन दिया था। यह अग्निकन्या देखते देखते हिटलर दीदी में भले ही तब्दील हो गयीं किन्तु वह भी एक आम भारतीय महिला जैसी ही हैं। धर्मभीरू, आस्थावान व पूजा पाठ में विश्वास रखने वाली। वे पिछले कई वर्षों से लगातार संतोषी माता का व्रत कर रही हैं। उस दिन पूरे दिन वह उपवास रखती हैं। जब उनकी मां गायत्री देवी जीवित थीं, उस वक्त वह कहीं भी जाने से पहले मां की आज्ञा लेना नहीं भूलती थीं। ममता के भाई गणेश बनर्जी बताते हैं कि दीदी मां काली की परम भक्त हैं। सुबह स्नान करने के बाद कुछ देर वह जरूर ईश्वर का ध्यान करती हैं।

विवाद व ममता एक दूसरे के पूरक
विवादों व ममता का चोली दामन का साथ है। उनके विरोधी कहते हैं कि बगैर कोई विवाद किये उनका खाना हजम ही नहीं होता। सत्ता में होते हुए भी कई बार तो उनका व्यवहार विरोधी दल के नेता की तरह का होता है। विरोधाभास की प्रतिमूर्ति हैं ममता। मुख्यमंत्री बनने के तत्काल बाद अस्पतालों के औचक दौरे के क्रम में एक नवजात शिशु को उसकी मां की गोद से लेकर उस पर अपनी ममता बरसाई। पर कोलकाता समेत मालदा व राज्य के अन्य इलाकों में बच्चों की लगातार होने वाली मौतों पर जब मीडिया ने उनकी आलोचना शुरू कर दी तो फिर उन्होंने इसका दोष पूर्ववर्ती वाममोर्चा सरकार पर यह कहते हुए डाल दिया कि उनकी वजह से ही कुपोषण के चलते बच्चों की मौत हो रही है। इसी तरह स्वयं एक महिला होने के बावजूद राजनीतिक बदले के तहत होने वाले महिलाओं से बलात्कार से यह कहते हुए पल्ला झाड़ लिया कि यह सारा कुछ (साजानो) मनगढ़ंत है। फिर तो उनका यह जुमला मीडिया की सुर्खियां बन गया। हर घटना को उन्होंने मनगढ़ंत कहना शुरू कर दिया। इसी बीच रेल किराये में हुई मामूली बढ़ोत्तरी को आधार बनाकर अपनी ही पार्टी के रेलमंत्री को चलता करने के लिए जिद की हद तक उतर आईं। इसे लेकर उन्हें मीडिया ने नया नाम दिया हिटलर दीदी।

                                                                                                  बद्रीनाथ वर्मा मोबाइल - 9718389836

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