Sunday, November 1, 2009

हर गली बाजार मंदी देश में

देश की दुर्दशा देख कर किसी कवि की ये पंक्तियाँ याद आती है --

मौन शंकर मौन चंडी देश में,

हो रहे हावी शिखंडी देश में।।

अपना बौनापन छिपाने के लिए,

बो रहे हैं वो अरंडी देश में।।

भाव की पर्ची लगी हर भाल पर,

हर गली बाजार मंदी देश में।। ------बद्री नाथ वर्मा , कोलकाता

No comments:

Post a Comment