आजकल एक ब्रांड जो देश-दुनिया में छाया हुआ है वह है ‘ब्रांड मोदी’। यह
ब्रांड ऐसा है जिस पर लोग आंख मूंदकर भरोसा कर रहे हैं। ‘ब्रांड मोदी’
लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है। गुजरात के मुख्यमंत्री से देश के
प्रधानमंत्री और अब वैश्विक नेता का रूप ले चुके नरेंद्र मोदी का सिक्का
देश की सरहद को लांघ कर विदेशों तक में धड़ल्ले से चल रहा है। हर कोई उनसे
मिलना चाहता है उन्हें देखना चाहता है। अभी एक ब्रिटिश अखबार ने अपनी
रिपोर्ट में कहा है कि आस्ट्रेलिया में चल रहे जी-20 शिखर सम्मेलन में
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सबसे मशहूर नेता हैं। वह ऐसे नेता हैं
जिनसे प्रत्येक आदमी मिलना चाहता है, उन्हें सुनना चाहता है। खुद अमेरिकी
राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी ‘मैन इन एक्शन’(काम करने वाला आदमी) कहकर मोदी
की तारीफ की है।
अपनी सक्रियता व लीक से हटकर काम करने की उनकी शैली
लगातार उनकी लोकप्रियता में इजाफा कर रही है। लेकिन इसी के साथ एक बात जो
लोगों को खटक रही है वह है उनके अन्य साथियों की निष्क्रियता या फिर उन पर
एक के बाद एक लगते आरोप। अभी ज्यादा दिन नहीं हुए जब गृहमंत्री राजनाथ सिंह
के बेटे पंकज सिंह व रेलमंत्री सदानंद गौड़ा के बेटों की कारस्तानी से
अखबारों के पन्ने रंगे पड़े थे। स्मृति ईरानी की शैक्षिक योग्यता को लेकर भी
खासा विवाद मच चुका है। एक मंत्री तो रेप के भी आरोपी हैं। विवादों की
श्रृंखला में ताजातरीन मामला मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री बाबूलाल
कठारिया का है। उन पर आरोप लगा है मार्कशीट में फर्जीवाड़ा करने का।
बहरहाल, बात अगर मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान की की जाए तो इसमें भी उनके आसपास के लोग फिसड्डी ही साबित हो रहे हैं। मोदी जहां वास्तविक रूप से श्रमदान कर जगह-जगह सफाई अभियान को प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं उनके चेले चपाटों के लिए यह सिर्फ फोटो खिंचाने भर का कार्यक्रम बन कर रह गया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के सफाई अभियान का एक फोटो भाजपा व मोदी की काफी छीछालेदर कर चुका है। इसी तरह एक जमाने में फिल्मी पर्दे की स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी की वजह से भी इस अभियान की भद्द पिट चुकी है। मथुरा में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करते हुए हेमा मालिनी के हाथ में झाड़ू तो दिखा पर वह जमीन से 6 इंच ऊपर ही रहा। ये सब ऐसी बातें हैं जो मोदी की नेकनीयती पर बदनुमा दाग लगाते हैं।
बहरहाल, बात ब्रांड मोदी की हो रही थी। यह ब्रांड लगातार अपना जलवा दिखा रहा है। लोकसभा चुनाव में अपने अकेले दम पर कच्छ से कामरूप व कश्मीर से कन्याकुमारी तक भाजपा का परचम लहरा देने वाले नरेंद्र मोदी का जादू अभी भी कम नहीं हुआ है। इस बात का सबूत हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिख गया है। हरियाणा में पहली बार अपनी दम पर व महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के समर्थन से भाजपा की सरकार बन गई है। इन चुनावों में ब्रांड मोदी ने जमकर अपना जौहर दिखाया। इसी ब्रांड मोदी के नये उत्पाद के रूप में सामने आये हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। दोनों की ही मोदी में अटूट आस्था है। इसी के साथ दोनों में एक और साम्य है कि इसके पूर्व दोनों में से कोई भी किसी मंत्री पद पर नहीं रहा है।
सादा जीवन और साफ-सुथरी छवि वाले आरएसएस के प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर की ख्याति बीजेपी में एक ऐसे व्यक्ति की है, जो हर काम पूरी शिद्दत से करते हैं और उतनी ही कुशलता से करवाते भी हैं। इधर-उधर के मुद्दों में उलझे बिना पर्दे के पीछे से पार्टी की मजबूती के लिए लगातार काम करते रहने वाले खट्टर बीजेपी में अहम पदों पर रहे और अक्सर अपने संगठन कौशल का लोहा मनवाया। बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी करीबी व मोदी के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें हरियाणा में सत्ता के शिखर पर पहुंचाया है। इसी तरह कॉरपोरेटर से मात्र 27 साल की उम्र में नागपुर के सबसे युवा मेयर बने देवेन्द्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र में भाजपा के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया है। मराठा राजनीति और मराठा नेताओं के वर्चस्व वाले इस राज्य में 44 वर्षीय फड़नवीस की आरएसएस में गहरी जड़ें तो हैं ही मोदी में भी उनकी गहरी निष्ठा है। ब्रांड मोदी के ये नये उत्पादों ने भी जता दिया है कि वे मोदी के नक्शेकदम पर चलकर अपने अपने राज्यों को बुलंदी तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं उठा रखेंगे। अब वे इसमें कितना कामयाब होते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में है परंतु एक बात तो बिल्कुल ही साफ है कि विपक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रांड मोदी अपनी चमक खोने की बजाय और ज्यादा चटख होता जा रहा है।
बहरहाल, बात अगर मोदी की महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत अभियान की की जाए तो इसमें भी उनके आसपास के लोग फिसड्डी ही साबित हो रहे हैं। मोदी जहां वास्तविक रूप से श्रमदान कर जगह-जगह सफाई अभियान को प्रोत्साहित कर रहे हैं वहीं उनके चेले चपाटों के लिए यह सिर्फ फोटो खिंचाने भर का कार्यक्रम बन कर रह गया है। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के सफाई अभियान का एक फोटो भाजपा व मोदी की काफी छीछालेदर कर चुका है। इसी तरह एक जमाने में फिल्मी पर्दे की स्वप्न सुंदरी हेमा मालिनी की वजह से भी इस अभियान की भद्द पिट चुकी है। मथुरा में स्वच्छता अभियान की शुरुआत करते हुए हेमा मालिनी के हाथ में झाड़ू तो दिखा पर वह जमीन से 6 इंच ऊपर ही रहा। ये सब ऐसी बातें हैं जो मोदी की नेकनीयती पर बदनुमा दाग लगाते हैं।
बहरहाल, बात ब्रांड मोदी की हो रही थी। यह ब्रांड लगातार अपना जलवा दिखा रहा है। लोकसभा चुनाव में अपने अकेले दम पर कच्छ से कामरूप व कश्मीर से कन्याकुमारी तक भाजपा का परचम लहरा देने वाले नरेंद्र मोदी का जादू अभी भी कम नहीं हुआ है। इस बात का सबूत हरियाणा व महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव में दिख गया है। हरियाणा में पहली बार अपनी दम पर व महाराष्ट्र में सहयोगी दलों के समर्थन से भाजपा की सरकार बन गई है। इन चुनावों में ब्रांड मोदी ने जमकर अपना जौहर दिखाया। इसी ब्रांड मोदी के नये उत्पाद के रूप में सामने आये हैं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर व महाराष्ट्र के युवा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस। दोनों की ही मोदी में अटूट आस्था है। इसी के साथ दोनों में एक और साम्य है कि इसके पूर्व दोनों में से कोई भी किसी मंत्री पद पर नहीं रहा है।
सादा जीवन और साफ-सुथरी छवि वाले आरएसएस के प्रचारक रहे मनोहर लाल खट्टर की ख्याति बीजेपी में एक ऐसे व्यक्ति की है, जो हर काम पूरी शिद्दत से करते हैं और उतनी ही कुशलता से करवाते भी हैं। इधर-उधर के मुद्दों में उलझे बिना पर्दे के पीछे से पार्टी की मजबूती के लिए लगातार काम करते रहने वाले खट्टर बीजेपी में अहम पदों पर रहे और अक्सर अपने संगठन कौशल का लोहा मनवाया। बावजूद इसके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी करीबी व मोदी के प्रति उनकी निष्ठा ने उन्हें हरियाणा में सत्ता के शिखर पर पहुंचाया है। इसी तरह कॉरपोरेटर से मात्र 27 साल की उम्र में नागपुर के सबसे युवा मेयर बने देवेन्द्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र में भाजपा के प्रथम मुख्यमंत्री बनने का गौरव हासिल किया है। मराठा राजनीति और मराठा नेताओं के वर्चस्व वाले इस राज्य में 44 वर्षीय फड़नवीस की आरएसएस में गहरी जड़ें तो हैं ही मोदी में भी उनकी गहरी निष्ठा है। ब्रांड मोदी के ये नये उत्पादों ने भी जता दिया है कि वे मोदी के नक्शेकदम पर चलकर अपने अपने राज्यों को बुलंदी तक पहुंचाने में कोई कोर कसर नहीं उठा रखेंगे। अब वे इसमें कितना कामयाब होते हैं यह तो भविष्य के गर्भ में है परंतु एक बात तो बिल्कुल ही साफ है कि विपक्ष की तमाम कोशिशों के बावजूद ब्रांड मोदी अपनी चमक खोने की बजाय और ज्यादा चटख होता जा रहा है।