Monday, August 13, 2012

दरियादिली, जायज कितनी


दरियादिली, जायज कितनी ( राष्ट्रीय साप्ताहिक इतवार में प्रकाशित)

इंट्रो : केकेआर की जीत पर अस्सी लाख रुपये पानी की तरह बहा देने वाली ममता बनर्जी अक्सर राज्य की कंगाली का रोना रोती रहती हैं। सवाल है, ऐसे में इस दरियादिली की जरूरत क्या थी

 अक्सर राज्य पर दो लाख करोड़ कर्ज का रोना रोकर केंद्र सरकार पर बार-बार आर्थिक मदद की गुहार लगाने वाली ममता बनर्जी की आईपीएल चैंपियन बनी शाहरुख की टीम कोलकाता नाइट राइडर्स के स्वागत में पानी की तरह पैसा बहाने की खूब आलोचना हो रही है। महज घरेलू टूर्नामेंट जीतने पर टीम का शाही स्वागत किसी को पच नहीं पा रहा है। इस दरियादिली पर वामपंथी पार्टियों ने ममता को आड़े हाथों लिया है। वहीं ममता से दुखी कांग्रेसी नेता खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे, पर ममता बनर्जी की शाहरुख की टीम पर दिखाई गयी यह गैरजरूरी ममता उन्हें भी हजम नहीं हो रही है। गौरतलब है कि राज्य सरकार ने मंगलवार को केकेआर की टीम को सम्मानित करने के लिए ईडन गार्डन्स में भव्य स्वागत समारोह आयोजित किया था। समारोह में शाहरुख खान, जूही चावला, केकेआर के खिलाडिय़ों और सपोर्ट स्टाफ को 10-10 ग्राम के गोल्ड मेडल बांटे गए। सूत्रों के मुताबिक ममता सरकार ने इस समारोह पर करीब 80 लाख रुपये फूंक डाले। हालांकि आधिकारिक तौर पर अभी इस बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है।
सीपीआई के वरिष्ठ नेता गुरुदास दासगुप्ता ने समारोह पर जनता का पैसा लुटाने पर ममता सरकार की जमकर आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मुझे नहीं मालूम की यह समारोह किसके लिए था? खिलाडिय़ों को सोने के मेडल बांटे गए। वे न तो कोई वल्र्ड कप जीतकर लौटे थे, न ही यह रणजी ट्रॉफी जैसी जीत थी। एक तरफ ममता राज्य के कर्जे में डूबे होने का रोना रोती रहती हैं और दूसरी तरफ इस तरह की फिजूलखर्ची करती हैं। यह बात समझ से परे है कि क्यों एक निजी लाभ के लिए बनी आईपीएल टीम की जीत को राज्य व देश की जीत बताया जा रहा है। राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी माकपा ने भी इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी। माकपा नेता रबीन देब कहते हैं कि चूंकि ममता से राज्य की जनता का मोहभंग होता जा रहा है। इसलिए वह इस तरह के तमाशे कर जनता को बरगलाना चाहती हैं। हालांकि इससे हासिल कुछ भी नहीं होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री राज्य के विकास कार्यों पर ध्यान देने के बजाय अपनी ऊर्जा का ज्यादा इस्तेमाल इस तरह की नौटंकी करने में जाया कर रही हैं। इसके विपरीत सम्मान समारोह की वामपंथी दलों की ओर से की जा रही आलोचना पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने उन्हें आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विरोधी पार्टियां चाहे इसका कुछ भी मतलब निकालें पर सच तो यह है कि केकेआर ने समूचे देश को गौरवान्वित किया है। उन्होंने अस्सी लाख रुपये खर्च किये जाने को लेकर हो रही आलोचना पर यह कहकर बचाव किया कि हमने कुछ नहीं किया है। सबकुछ कोलकाता नगर निगम (केएमसी) द्वारा किया गया था। अन्य राज्यों में खिलाडिय़ों को करोड़ों रुपये मिलते हैं। टूर्नामेंट जीतने पर कार दी जाती है। हमें अपने मेहमानों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए यह हमें माकपा से सीखने की जरूरत नहीं है।Ó बावजूद इसके प्रबुद्ध बंगाली समाज के एक वर्ग ने भी ममता के इस फिजूलखर्ची पर सवाल उठाया है। उनके अनुसार केकेआर के सम्मान के नाम पर किए गए इस भारी व्यय का कोई तुक नहीं बनता है। केकेआर निजी लाभ के लिए बनी है।
ममता से हलकान कांग्रेस नेता खुलकर तो कुछ नहीं बोल रहे हैं। लेकिन यह जरूर कह रहे हैं कि केंद्र के सामने भीख मांगने वाली ममता की दरियादिली समझ से परे है। उनका कहना है कि शाहरुख खान का शो तो उनके व्यावसायिक हितों के अनुकूल है, लेकिन जिस तरह से इस व्यावसायिक तमाशे को सियासी बना दिया गया, वह समझ से परे है। बीजेपी नेता अंदरखाने तो इस कदम पर नाक-भौंह सिकोड़ रहे हैं, लेकिन औपचारिक रूप से खुलकर कुछ नहीं बोल रहे हैं। अटकलें लगाई जा रही हैं कि ममता को अपने पाले में लाने को आतुर भाजपा उनकी आलोचना कर उन्हें नाराज नहीं करना चाहती। भाजपा का मानना है कि जिस तरह ममता बनर्जी से केंद्र आजिज आ चुका है उससे निकट भविष्य में उन्हें यूपीए से बाहर का रास्ता दिखाया जा सकता है। केंद्र की ओर से इसके संकेत दे भी दिये गए हैं। यूपीए सरकार के तीन साल पूरे होने के उपलक्ष्य में दिल्ली में आयोजित डिनर पार्टी में जिस तरह से समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव को तवज्जो दी गई, उससे भी इस संभावना को बल मिला। ममता के नित नये बखेड़े से आजिज कांग्रेस अब उनसे पल्ला झाडऩे का पूरा मन बना चुकी है। हालांकि यह राष्ट्रपति चुनाव के बाद ही होगा। इसी संकेत को समझते हुए ही बहरमपुर के सांसद अधीररंजन चौधरी ने कह दिया था कि यदि इतनी ही परेशानी है तो ममता बनर्जी यूपीए छोड़ क्यों नहीं देतीं।
गौरतलब है कि पिछले दिनों पेट्रोल के दाम बढ़ाए जाने के खिलाफ ममता बनर्जी ने कोलकाता की सड़कों पर एक विशाल जुलूस निकाला था। इसी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अधीररंजन ने उक्त टिप्पणी की थी। हालांकि बहरमपुर के इस सांसद को ममता विरोधी ही माना जाता है किंतु इस बार की उनकी यह टिप्पणी उनके मन की भड़ास नहीं मानी जा रही है। राज्य के राजनीतिक गलियारों में उनके वक्तव्य के अलग मायने निकाले जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि उनका यह बयान पूरी तरह से सोच समझ कर दिया गया है। इसी बहाने ममता को उनकी औकात दिखाई गई है। प्रदेश कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि ममता का यही रवैया रहा तो जल्द ही उन्हें यूपीए से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाएगा। उनके अनुसार किसी भी चीज की अति बुरी होती है। किसी भी चीज को सहने की एक सीमा होती है। चीजें जब हदें पार करने लगती हैं तो कोई न कोई समाधान करना ही पड़ता है। उन्होंने इशारों ही इशारों में बता दिया कि अब प्रदेश कांग्रेस को केंद्रीय नेतृत्व से परमिशन मिल गई है। अब ममता को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।  
उधर, केकेआर के मालिक शाहरुख खान ने ममता सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि खुश रहने और खुशियां बांटने में कोई नुकसान नहीं है। इस पर राजनीति नहीं की जानी चाहिए। यह सिर्फ इसलिए किया गया क्योंकि हम सभी लोग खुश थे। भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने भी सरकार का पक्ष लेते हुए कहा कि जीत का उत्सव मनाने में लोगों की आलोचना की कोई वजह नहीं दिखती।

बद्रीनाथ वर्मा 9718389836

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