Wednesday, August 14, 2013

लातों का भूत है पाकिस्तान

                          Badrinath Verma

एक देसी कहावत है कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते। पड़ोसी देश पाकिस्तान भी ऐसा ही भूत है। उसे बातों से नहीं समझाया जा सकता। यह पूरी तरह से साबित हो गया है। वह हमारी भलमनसाहत को हमारी कमजोरी समझकर बार बार हमें उकसाने वाली कार्रवाई करता रहा है। जम्मू-कश्मीर के पुंछ क्षेत्र में हमला कर पाकिस्तानी सेना द्वारा पांच भारतीय सैनिकों की हत्या से पड़ोसी देश के नापाक मनसूबे एक बार फिर उजागर हो गये हैं। हालांकि यह सवाल पूछा जा सकता है कि पाकिस्तान के मनसूबे नापाक कब नहीं थे। पाकिस्तान की बागडोर नवाज शरीफ के हाथों में आ जाने के बाद लगा कि नये सिरे से भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते की गरमाहट आयेगी। पर ऐसी सद्इच्छा रखने वालों को शायद यह पता नहीं था कि नवाज सिर्फ नाम के शरीफ हैं। और हमारे प्रधानमंत्री नाम के सिंह। न तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री में कोई शराफत है और न ही हमारे प्रधानमंत्री में नाम के अनुरूप गुण। यह नहीं भूलना चाहिए कि इन्हीं नवाज शरीफ के शासनकाल में करगिल हुआ था। हां, यह अलग बात है कि इसका ठीकरा उन्होंने जनरल परवेज मुशर्रफ के सिर पर फोड़ा था। पाक सेना जब तब हमें मुंह चिढ़ाती हुई हमारी सीमा में घुस आती है और कभी हमारे जवानों का सिर काटकर ले जाती है तो कभी भारी गोलीबारी कर हमारे जवानों का खून करती है। बावजूद इसके केंद्र सरकार पाकिस्तान को कोई कड़ा जवाब देने से बचती प्रतीत होती है। आखिर क्यों? देश यह जानना चाहता है कि वह कौन सी मजबूरी है जो पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने से हमें रोकती है। कभी चीन हमारे भू भाग पर कब्जा कर हमारे सैनिकों को वहां से खदेड़ देता है तो कभी भारत के सामने मच्छर की सी हैसियत रखने वाला पाकिस्तान युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए हमारे पांच जवानों को शहीद कर देता है, और हम हैं कि सिर्फ मूकदर्शक बने देखते रहते हैं। पाकिस्तानी सेना द्वारा हमारे पांच जवानों की हत्या से देश की जनता का खून खौल रहा है। देश का मिजाज इस पार या उस पार का बन रहा है। देश चाहता है कि पाकिस्तान को ऐसा सबक सिखाया जाय कि वह फिर ऐसी हिमाकत करने से पहले सौ बार सोचे। देश का मिजाज समझते हुए ही बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा यह पूछते हैं कि कांग्रेस का हाथ किसके साथ? भारत के या फिर पाकिस्तान के? उन्होंने ये बातें लोकसभा में पुंछ में पाकिस्तानी हमले में 5 जवानों के शहीद होने के मसले पर चर्चा के दौरान कहीं। गौर करने वाली बात है कि जब यशवंत सिन्हा बोल रहे थे तो उस वक्त सदन में जमकर हंगामा हो रहा था। हंगामे से नाराज यशवंत सिन्हा ने यह सवाल उठाया कि कांग्रेस अपनी स्थिति स्पष्ट करे। वह किसके साथ है। भारत के या फिर पाकिस्तान के?' बीजेपी नेता यशवंत सिन्हा ने अपने बयान में कहा, 'पाकिस्तान ने हमारी धरती में घुसकर सेना के पांच जवानों को मौत के घाट उतार दिया। जनवरी में भी एक जवान का सिर काटकर ले गए थे। पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देना होगा। हमारी सेना में बहुत ताकत है पर उसे असहाय कर दिया गया है।' सिन्हा सही कह रहे हैं। सेना को अगर छूट दे दी जाय तो विश्व मानचित्र से पाकिस्तान का नक्सा गायब होने में आधे घंटे से ज्यादा नहीं लगेंगे। इस बीच केंद्रीय मंत्री और जम्‍मू कश्‍मीर के पूर्व मुख्‍यमंत्री फारुख अब्‍दुल्‍ला ने पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को चेतावनी देते हुए कहा कि वे इस तरह की हरकतों पर रोक लगाएं, नहीं तो एक वक्‍त आ जाएगा जब हिन्‍दुस्‍तानी फौज भी अपने को कंट्रोल नहीं कर पाएगी। वहीं, बीजेपी प्रवक्‍ता रविशंकर प्रसाद का सवाल है कि और कितने जवान मरेंगे, और कितनों का बलिदान होगा? इस संदर्भ में मुलायम सिंह यादव ने लोकसभा में कहा कि 'ऐसा लगता है कि पाकिस्तान अब हमसे नहीं डरता है। इसलिए ऐसी हरकतें कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ चीन भारत पर हमला करने की तैयारी कर रहा है। उसने तो नया नक्शा भी तैयार कर लिया है। पाक से हमारी सीमा को खतरा है। इसके अलावा चीन से भी सचेत रहने की जरूत है। चीन धोखेबाज देश है। इस बार दोनों देश एक साथ धोखा दे रहे हैं। सोनियाजी और रक्षा मंत्री साहब चीन पर भरोसा मत करिएगा।
पाकिस्तानी नियंत्रण रेखा से सटे पुंछ के चाकन-दा-बाग के सरला चौकी पर तैनात इन जवानों पर पाकिस्तानी सैनिकों ने भारतीय सीमा में करीब 450 मीटर तक घुस कर गोलीबारी की, जिसमें कुल पांच जवान शहीद हो गए थे। इन शहीद जवानों में चार बिहार के और एक महाराष्ट्र का था। 21वीं बिहार रेजिमेंट के शहीद हुए जवानों में पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र निवासी विजय राय, भोजपुर जिला निवासी शंभू शरण सिंह, और सारण जिला के सम्हौता गांव निवासी प्रेमनाथ सिंह और सारण के ही एकमा गांव के रघुनंदन प्रसाद शामिल थे। जबकि महाराष्ट्र के कोल्हापुर निवासी शहीद जवान का नाम कुंडलीक माने है। हैरानी की बात यह रही कि शहीदों के सम्मान में कसमें खाने वाला एक भी मंत्री जवानों को श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट नहीं पहुंचा। 7 अगस्त की रात दिल्ली एयरपोर्ट पर पूरे सम्मान के साथ शहीदों के शव उतारे गए, पर उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए मौके पर न तो रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी मौजूद थे और न ही केंद्र सरकार का कोई और मंत्री। यह हाल तब है, जब संसद का मॉनसून सत्र चल रहा है और केंद्र सरकार का लगभग हर मंत्री दिल्ली में मौजूद है। बावजूद इसके एक भी मंत्री को इतनी फुरसत नहीं मिली कि शहीदों के सम्मान में एयरपोर्ट तक पहुंचता। इस मामले में बिहार तो और दो कदम आगे ही निकला। राज्य के मंत्रियों की बेरुखी का आलम यह था कि शहीद हुए बिहार के चार जवानों का पार्थिव शरीर जब पटना पहुंचा तो न तो राज्य सरकार का एक भी मंत्री जवानों को श्रद्धांजलि देने एयरपोर्ट पहुंचा और न ही उनकी अंत्येष्टि में ही कोई मंत्री शामिल हुआ। इन जवानों पर घात लगाकर किये गये पाकिस्तानी हमले से जहां देश उबल रहा है, लोग जगह जगह धरना प्रदर्शन के माध्यम से पाकिस्तान के खिलाफ अपने गुस्से का इजहार कर रहे हैं, वहीं इसे लेकर सियासत की बेशर्म तकरीर भी सुनने को मिली। दरअसल, शहीद जवानों की अंतिम क्रिया में किसी मंत्री के नहीं पहुंचने को लेकर बिहार के ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह से जब यह पूछा गया कि वे शहीदों के अंतिम संस्कार में क्यों शामिल नहीं हो सके। उनका जवाब था कि सेना और पुलिस में लोग मरने ही जाते हैं। मंत्री महोदय यहीं नहीं रुके बल्कि उल्टे रिपोर्टर से ही सवाल कर डाला, 'आप क्यों नहीं गए नागरिक के तौर पर, आप ड्यूटी पर थे न आपके बाबूजी गए थे वहां? आपके पिता नागरिक हैं न? आपके पिता गए वहां?
जैसे ही भीम सिंह का यह बयान सामने आया बिहार में सियासी हंगामा मच गया। आरजेडी के विधायक भाई वीरेंद्र ने तो उनसे इस्तीफे की मांग कर ली। बीजेपी नेता राजीव प्रताप रूडी ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने मंत्री को बर्खास्त कर देना चाहिए। अपने मंत्री के कारनामे के बाद बढ़ते राजनीतिक दबाव से त्रस्त मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक्शन में आए। उन्होंने भीम सिंह के इस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और माफी मांगने को कहा। नीतीश कुमार की नाराजगी के बाद भीम सिंह ने मीडिया के सामने माफी मांग ली। मीडिया के तमाम सवालों पर वह एक ही वाक्य कहते नजर आए, 'मेरे बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया। लेकिन मैं इस पूरे प्रकरण पर खेद प्रकट करता हूं।' भीम सिंह ने भले ही माफी मांग ली पर यह तो साबित हो ही गया कि सरहद की रक्षा करते हुए हमारे शहीदों के लिए हमारे सियासतदानों के मन में कैसी ओछी सोच है।


अब नहीं चलेगी मुंह में राम बगल में छुरी
 पुंछ में पाकिस्तान के कायरतापूर्ण हमले का सीधा असर अब भारत-पाक बातचीत पर पड़ता नजर आ रहा है। फिलहाल जो संकेत मिल रहे हैं, उनसे यही लगता है कि मौजूदा हालात में भारत पड़ोसी मुल्क से किसी भी स्तर की बातचीत के लिए तैयार नहीं है। दोनों देशों के बीच सचिव स्तर की बातचीत रोक दी गई है। अब बड़ा सवाल यह है कि अगले महीने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में भी क्या मनमोहन सिंह पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात करेंगे। सूत्रों की मानें तो चौतरफा दबाव के बीच मनमोहन इस मुलाकात को भी टाल सकते हैं।
इस बीच, इस्लामाबाद में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने सीमा पर बढ़े तनाव पर अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की। बैठक में सेना के शीर्ष अधिकारी और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार सरताज अजीज भी शामिल हुए। बैठक के बाद दिए बयान में शरीफ ने पुंछ हमले का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने बस इतना कहा कि एलओसी पर युद्धविराम बहाल करने के लिए वह भारत के साथ मिलकर कदम उठाएंगे।उन्होंने कहा कि दोनों देशों के हित में है कि हालात न बिगड़ने दिए जाएं।
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गोपीनाथ मुंडे बीजेपी के एंटनी
पुंछ हमले पर जिस बयान को लेकर बीजेपी अब तक रक्षा मंत्री ए के एंटनी को घेरती आई, अब खुद भी उसी सियासी बयानबाजी के दलदल में फंसती नजर आ रही है। इसकी वजह है पार्टी के नेता गोपीनाथ मुंडे का वो बयान जिसमें उन्होंने कहा कि भारतीय सेना के जवान कुंडलीक माने पाकिस्तान बॉर्डर पर आतंकी हमले में शहीद हो गए थे। जैसे ही मुंडे ने ये बयान दिया एनसीपी ने बीजेपी पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए उनपर धावा बोल दिया। अब एनसीपी उनसे माफी की मांग कर रही है।
एनसीपी का कहना है कि बीजेपी ने ऐसे ही बयान पर एंटनी की माफी को लेकर दो दिन तक संसद नहीं चलने दी। शहीद माने की मौत पाकिस्तान बॉर्डर नहीं बल्कि एलओसी पर हुई थी। दरअसल, गोपीनाथ मुंडे कोल्हापुर में शहीद कुंडलीक माने के अंतिम-संस्कार में शामिल होने गए थे। उन्होंने ये बातें इस दौरान ही कहीं।
शहीदों पर सियासत का सिलसिला यहीं नहीं थमा। एनसीपी ने शहीद जवान के अंतिम-संस्कार में नहीं आने के लिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण पर भी निशाना साधा है। उसका कहना है कि राजकीय सम्मान के कुछ प्रोटोकॉल होते हैं। प्रोटोकॉल का पालन तो हुआ पर राज्य के मुख्यमंत्री को नैतिक तौर पर आना चाहिए था।
गौरतलब है कि शहादत पर बयानबाजी की शुरुआत 6 जुलाई को रक्षा मंत्री के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने कहा था कि हमलावर पाक सेना की वर्दी में आए थे। बीजेपी ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा था कि ऐसा कहना पाकिस्तानी सेना को क्लीनचिट देना है। हालांकि, चौतरफा दबाव के बीच रक्षा मंत्री ने गुरुवार को संसद में माना कि चक्कां दा बाग चौकी पर हुआ हमला, जिसमें पांच भारतीय जवान शहीद हो गए, पाकिस्तानी सेना की ओर से ही किया गया था।

रुपया नहीं, पाकिस्तान को जवाब दो

जम्मू एवं कश्मीर के पुंछ में पाकिस्तान की तरफ से हुई फायरिंग में शहीद हुए जवानों के गांव वाले पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस बीच शहीद विजय कुमार राय की पत्नी पुष्पा राय ने सरकार द्वारा घोषित सहायता राशि लेने से इनकार कर दिया है। बिहार की राजधानी पटना के बिहटा के आनंदपुर ठेकहा गांव निवासी शहीद विजय कुमार राय की पत्नी पुष्पा पूछती हैं कि क्या किसी व्यक्ति की कीमत 10 लाख रुपये है। सहायता राशि लेने से इनकार करते हुए शहीद की पत्नी की मांग है कि पहले पाकिस्तान पर कार्रवाई हो फिर सहायता राशि की बात होगी। विजय राय के चाचा रामजी सिंह कहते हैं कि आखिर पाकिस्तान बार बार भारतीय सैनिकों की जान लेता है, परंतु सरकार कोई कदम क्यों नहीं उठाती है।

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